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कौन से समीकरण बचायेंगे, खट्टर की कुर्सी!

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चंडीगढ़ (24 अक्टूबर 2019) डेस्क 12.00 PM IST

हरियाणा में विधान सभा चुनाव में अबकी बार पचहतर पार का नारा फेल होने पर भाजपा का खेमा सूना-सूना दिखाई दे रहा है। हालांकि भाजपा के प्रवक्ता और नेता अभी भी जोश लिए हुए हैं। रुझान के आंकड़ों को देखें तो भाजपा का ग्राफ अभी भी 40 सीटों से ऊपर नहीं उठा है, वहीं कांग्रेस ने पिछली बार के विधानसभा के नतीजों से दो गुनी बढ़त बनाई हुई है। दोनों ही पार्टियाँ बहुमत से दूर हैं। ऐसे में जेजेपी अपनी किंगमेकर वाली स्थिति में आ गयी है। इसके अलावा निर्दलियों की भूमिका भी अहम होने वाली है। अब देखना ये होगा कि दुष्यंत चौटाला किस पार्टी के लिए अपनी चाबी से सरकार बनाने के लिए ताला खोलेंगे।

अब बात करें कि किस तरीके से हरियाणा में भाजपा सरकार बना सकती है, तो अगर भाजपा का आंकड़ा 40 सीटों पर सिमटता है, तो या तो जेजेपी से या फिर निर्दलीय उम्मीदवारों से समर्थन माँगा जा सकता है। ताजा खबर के अनुसार मुख्यमंत्री खट्टर को दिल्ली तलब किया जा चुका है  व भाजपा अध्यक्ष सुभाष बराला भी अपनी हार स्वीकार कर दिल्ली रवाना हो चुके हैं जहाँ सरकार बनाने के लिए जरूरी जादुई आँकड़ा जुटाने की संभावनाओं पर गृहमंत्री अमित शाह के साथ विचार किया जा रहा है। फिलहाल भाजपा के लिए एक ही संभावना दिखाई दे रही है कि यदि उसे हरियाणा में अपनी सरकार बनानी है, तो उसे किसी भी सूरत में जजपा को अपने पक्ष में करना होगा।

फिलहाल जजपा ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं तथा कल अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है जिसमें आगामी संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए भाजपा के लिए यही संतोष की बात है कि चुनावी नतीजों में वह सबसे बड़ी पार्टी बनती दिखाई दे रही है जिसके आधार पर वह सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है। राज्यपाल से न्यौता मिलने पर बहुमत सिद्ध करने के लिए जादुई आँकड़ा जुटाने के लिए उसे कुछ दिनों की मोहलत मिल सकती है।  

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